पाकिस्तान: आतंकियों का गढ़ या आतंकिस्तान?
जब किसी देश की सेना आतंकवादियों के ताबूतों पर फूल चढ़ाकर उन्हें शहीद का तमगा देने लगे, जब किसी देश का रक्षा मंत्री अपने ही देश के मदरसों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को आतंकी और जिहादी बनाने की बात करने लगे, जिस देश में फौज पुलवामा जैसे आतंकी हमले को रणनीतिक जीत बताकर जश्न मनाए, जिस देश में लादेन मारा जाए, लशकर तबा, जैश मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क, जमातुल दावा के आतंकवादियों का गढ़ हो, जिस देश में हाफिज सैद, मसूद अजहर, साजिद मीर, दाऊद इब्राहिम जैसे वैश्विक आतंकवादियों का घर हो...
जिस देश में सेना की तरफ से बात रखने वाला व्यक्ति, जो डीजीआईएसपीआर है, वो लादेन के लिए बम बनाने वाले का बेटा हो... जो देश आतंक की लिस्ट में 2018 से 2022 तक ग्रे लिस्ट में रहा... वो आतंक का पोषक नहीं, आतंकी राष्ट्र है। नाम है पाक पर हरकतें नापाक। यह कहावत इस देश की काली करतूत के लिए आईना है और इसलिए अगर आप इसे आतंकिस्तान कहेंगे तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा बल्कि यह कहना सच होगा – कम से कम तब तक जब तक पाकिस्तान आतंकवादियों को पालपोस रहा है।
पाकिस्तान के लोग अक्सर यह कहते हैं कि भारत में लोग उनके खिलाफ नफरत फैलाते हैं, लेकिन आज पाकिस्तान के वो लोग जो हमें सुन रहे हैं, उनसे हमारा सवाल है: भाई, ज़रा तुम बताओ, जब सारी दुनिया के सामने अमेरिका, जिसको आज तुम 'पापा' कह रहे हो, जिसके पैसे से तुम्हारे घर में दाल रोटी आ रही है, जिसके कहने पर तुम सीज़ फायर और फिर सीज़ फायर के नाम पर जीत का जश्न मना रहे हो, पटाखे फोड़ रहे हो... जब वही अमेरिका तुम्हारी सरज़मीं पर आकर दुनिया के सबसे बड़े आतंकियों में से एक ओसामा बिन लादेन को मारता है, जब दाऊद इब्राहिम – जो मुंबई में हुए बम धमाकों का मुख्य गुनहगार है – वो तुम्हारे शहर कराची में घर बनाता है, जब तुम्हारा देश जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों का पनाहगाह बन जाता है...
जब तुम्हारी सेना के बड़े-बड़े अफसर उन आतंकवादियों के जनाजे में जाते हैं, उन्हें शहीद कहते हैं, उन पर पाकिस्तान का झंडा लपेटते हैं, जब मसूद अज़हर खुद कहता है कि भाई उसका पूरा खानदान यहां रहता है जो मारा गया है, तो फिर तुम नफरत का इल्जाम हिंदुस्तान पर कैसे लगा सकते हो? ये तो तुम्हारे अपने पाप हैं। और अगर गहराई से सोचोगे तो यही वजह है जिसकी वजह से तुम्हारी एक्ट्रेस सबा कमर ने कहा था कि जब दुनिया में हम कहीं जाते हैं तो पाकिस्तानी पासपोर्ट की वजह से शर्मिंदा हो जाते हैं। सबा कमर तो तुम्हारी हीरोइन है। उसका वीडियो देख लेना। उसने खुद कहा था कि भारत के तमाम लोगों के साथ वो घूमने गई थी, भारतीयों का पासपोर्ट देखकर उन्हें जाने दिया गया, और उसके बाद सबा कमर को रोक लिया गया। कभी यहां छुआ गया, कभी वहां छुआ गया, और फिर चेक कराया गया।
वो ह्यूमिलेशन जो सबा कमर जैसी मशहूर एक्ट्रेस – जिसने हिंदुस्तान में भी फिल्मों में काम किया है – ने पाकिस्तान का पासपोर्ट लेकर महसूस किया, तो क्या उसके लिए भी भारतीय जिम्मेदार थे? नहीं साहब। उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं थे। उसके लिए आतंकवाद पर आंख मूंदने का तुम्हारा रवैया जिम्मेदार था। और उसी वजह से आज तुम्हें Girlfriend कहा जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की मेहरबानियों पर मत जाना। ट्रंप ने तुम्हारा साथ इसलिए दिया क्योंकि उसे चीन से अपना हित साधना है, उसे दुनिया में मसीहा बनना है, सरदार बनकर रहना है, और इसलिए वो तुम्हें पालेगा- पोसेगा ताकि जैसे चाइना तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा है, वैसे ही चाइना के सामने वो तुम्हारा इस्तेमाल कर सके। लेकिन क्या इससे तुम्हारे ऊपर से आतंकिस्तान का टैग हटेगा? नहीं।
और ऑपरेशन सिंदूर में यह और स्पष्ट हुआ। भारत ने जब सटीक कार्रवाई की तो उसने पाकिस्तान के तमाम आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। भारत ने पूरी दुनिया के सामने बार-बार कहा कि पाकिस्तान और हम में अंतर है। पाकिस्तान हमारे रिहाइशी इलाकों पर हमला कर रहा था, सैन्य इलाकों पर हमला कर रहा था लेकिन हमने केवल उन इलाकों पर हमला किया जहां पर पाकिस्तान के आतंकी रहते थे। और पाकिस्तान में आतंकियों ने इस बात को माना। मसूद अज़हर का वह लेटर सामने आया जिसमें उसने कहा कि काश मैं भी मर जाता।
उसके बाद उन्हीं आतंकवादियों के जनाजे में जब पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अधिकारी गए, तब दुनिया ने देखा। उनके ताबूतों को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया, सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। तब दुनिया ने देखा। और क्या यह कोई सभ्य देश कर सकता है? जवाब है – नहीं, कोई नहीं कर सकता। जो मारे गए, उनका नाम भी बता दें। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मुदस्सर खाद्यादियान उर्फ़ अबू जुंदाल – इसके अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके ताबूत पर पाक सेना प्रमुख और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की गई।
नमाज़ एक सरकारी स्कूल में पढ़ी गई, जिसका नेतृत्व जमातुद दावा के आतंकी हाफिज अब्दुल रऊफ ने किया। इस समारोह में पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल और पंजाब पुलिस के आईजी थे। इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हाफिज मोहम्मद जमील और मोहम्मद यूसुफ अज़हर के जनाजे में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन के बड़े-बड़े लोग शामिल थे। खालिद और मोहम्मद हसन जैसे आतंकियों के अंतिम संस्कार में सेना की मौजूदगी दुनिया को यह बता रही थी कि पाकिस्तान की सेना और आतंकवादियों में बहुत फर्क नहीं है।
ऐसी ही और भी कई कहानियाँ हैं: आतंकवादियों के ताबूतों पर पाकिस्तानी झंडे लपेटना, उनके जनाजे में पाकिस्तान समाज के तमाम लोगों का शामिल होना – यह बताता है कि पाकिस्तान के समाज में आतंक की जड़ें बहुत गहरी हो गई हैं और इसी वजह से शायद जो सेना की तरफ से बात रखने आते हैं, वो खुद आतंकवादियों के घर से आते हैं। डीजीआईएसपीआर – आपको जानकर हैरानी होगी कि इंडिया और पाकिस्तान की लड़ाई के बीच में जो पाकिस्तान की तरफ से आकर इंडिया को धमकी दे रहे थे, लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी – डीजीआईएसपीआर, जो पाकिस्तान की बेगुनाही का राग अलाप रहे थे – वो खुद आतंक के साए में पले-बढ़े।
इनके पिताजी सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद – उन्हें यूएन ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। महमूद ने 1999 में 'उम्मा तामीर-ए-नौ' नाम का एक आतंकी संगठन बनाया था और ओसामा बिन लादेन को परमाणु हथियारों की जानकारी दी थी। ये वही शख्स हैं जिन्होंने अल-कायदा और तालिबान को फंडिंग और टेक्निकल मदद दी थी। इसके बावजूद इनके बेटे को पाकिस्तानी सेना में तीन सितारा जनरल बनाया गया। आईएसपीआर जैसा महत्वपूर्ण पद दिया गया। यह बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तानी सेना का आतंक से क्या कनेक्शन है।
क्योंकि आतंकवादियों के बेटे को न केवल पनाह देना, बल्कि ऊँचे-ऊँचे ओहदों पर बैठाकर सम्मानित करना – यह पाकिस्तान के आतंक कनेक्शन को उजागर करता है। पाकिस्तान का आतंकी माइंडसेट समझना हो तो हाल के एक बयान को देखिए: पाकिस्तान ने पुलवामा हमला – 2019 – को रणनीतिक सफलता करार दिया पाकिस्तानी वायुसेना के एक अधिकारी ने इसे अपनी टैक्टिकल ब्रिलियंस कहा। ऑपरेशन सिंदूर को अपनी रणनीतिक समस्या का प्रदर्शन बताया। अब यह बयान पाकिस्तान की आतंकवादी मानसिकता को दर्शाता है। यह भी बताता है कि वे आतंकवाद को अपनी नीति मानते हैं।
पुलवामा, पहलगाम, 2001 में संसद हमला, 2008 में मुंबई नरसंहार, 2016 में उरी, उसके बाद फिर पुलवामा – हर हमले का कनेक्शन पाकिस्तान से जुड़ा रहा। भारत ने हर बार सबूत दिए, लेकिन पाकिस्तान हर बार दुनिया को धोखा देता रहा। यह जड़ें बहुत ऊपर तक जुड़ी हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान देखिए। नेशनल असेंबली में खुलेआम कहते हैं कि मदरसों के बच्चों से जिहाद करवाएंगे।
मतलब, बच्चों को शिक्षा के बजाय आतंक की राह पर धकेलना। यह बयान पाकिस्तान की गिरी हुई सोच का कबूलनामा है।
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